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Tuesday, 25 July 2017

कोविंद के प्रेसिडेंट बनते ही पूर्व जस्टिस कर्णन ने लगाई सजा माफी की अर्जी

कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में छह महीने की सजा काट रहे कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस सीएस. कर्णन ने रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति बनते ही उनके सामने सजा माफी की अर्जी दायर की है। कर्णन पिछले कुछ महीनों में काफी विवादित रहे हैं। उन्होंने यह अर्जी अपने वकील मैथ्यूज जे. नेदुम्पारा के जरिए नए राष्ट्रपति तक पहुंचाई है। वकील ने क्या कहा...

- कर्णन के मुताबिक, उन्होंने यह अर्जी संविधान की धारा 72 के तहत दायर की है। इसमें राष्ट्रपति को सजा माफी का अधिकार दिया गया है।
- बता दें कि 9 मई को सुप्रीम कोर्ट के 7 जजों की बेंच ने जस्टिस कर्णन को यह सजा सुनाई थी। उन्हें कोयम्बटूर से 20 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें फिलहाल, प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम (सुधार ग्रह) में रखा गया है।
- बता दें कि कर्णन किसी भी हाईकोर्ट के सजा पाने वाले पहले जज हैं।
क्या है मामला?
- जस्टिस कर्णन ने 23 जनवरी को पीएम को लेटर लिखकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों और मद्रास हाईकोर्ट के मौजूदा जजों पर करप्शन के आरोप लगाए थे। इसकी वजह से उन पर अवमानना का केस चल रहा है। कई बार नोटिस जारी होने के बाद भी वो कोर्ट में हाजिर नहीं हुए हैं।
- चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुआई वाली सात जजों की बेंच ने 10 मार्च को जस्टिस कर्णन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। उन्हें 31 मार्च को कोर्ट में हाजिर करने का ऑर्डर दिया गया था।

दलित होने की वजह से मुझ पर हो रही कार्रवाई: कर्णन
- कर्णन सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को लेटर लिखकर यह आरोप भी लगा चुके हैं कि दलित होने की वजह से उन पर यह एक्शन लिया जा रहा है।
उन्होंने अपने लेटर में लिखा था, "यह ऑर्डर (सुप्रीम कोर्ट का नोटिस) साफ तौर पर बताता है कि ऊंची जाति के जज कानून अपने हाथ में ले रहे हैं और अपनी ज्यूडिशियल पावर का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।"
- "यह एक एससी/एसटी (दलित) जज से छुटकारा पाने के लिए किया जा रहा है।"

Source:-Bhaskar

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